उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण
विश्व स्वास्थ्य दिवस 2013 का थीम है - उच्च रक्तचाप यानि हाइपरटेंशन। इससे दिल का दौरा, ह्दयाघात और गुर्दे फेल होने का खतरा बढ़ता है और यदि इसे अनियंत्रित छोड़ दिया गया तो अंधापन, दिल की अनियमित धड़कन और दिल का रूकना, रक्त-नाडि़यों का फटना तथा मस्तिष्क में खराबी पैदा हो सकती है। हर तीन प्रौढ़ व्यक्तियों में से एक इससे प्रभावित है और हर साल दुनिया में इसके कारण 90 लाख से अधिक मौतें होती है।
विश्व स्वास्थ्य दिवस 2013 का थीम है - उच्च रक्तचाप यानि हाइपरटेंशन। इससे दिल का दौरा, ह्दयाघात और गुर्दे फेल होने का खतरा बढ़ता है और यदि इसे अनियंत्रित छोड़ दिया गया तो अंधापन, दिल की अनियमित धड़कन और दिल का रूकना, रक्त-नाडि़यों का फटना तथा मस्तिष्क में खराबी पैदा हो सकती है। हर तीन प्रौढ़ व्यक्तियों में से एक इससे प्रभावित है और हर साल दुनिया में इसके कारण 90 लाख से अधिक मौतें होती है।
ह्दय, शरीर का एक
अद्भुत अंग है, जो बिना रूके दिन-रात काम करता है तथा एक मिनट में 70 बार धड़कते
हुए दिन में एक लाख बार धड़कता है। यह हजारों किलोमीटर लम्बी रक्त-नाडि़यों के
जरिए शरीर की प्रत्येक कोशिका को पोषित करता है। ह्दय से जाने वाले रक्त और ह्दय
में लौटने वाले रक्त का सही दिशा में संचालन रक्त वाहक वाल्व के जरिए होता है।
स्टेथोस्कॉप में जो आवाज सुनाई देती है, वह इन्हीं वाल्वों के चलन की होती है।
उच्च रक्तचाप से
धमनियां कड़ी होकर संकुचित हो जाती है, जिससे ह्दय या मस्तिष्क तक रक्त के
पहुंचने में रूकावट आती है और दिल का दौरा पड़ता है। रक्तचाप अधिक होने के कोई
शुरूआती लक्षण नहीं दिखायी देते हैं। जिनमें उच्च रक्तचाप होता है, उन्हें तब
तक कोई तकलीफ महसूस नहीं होती है, जब तक ह्दयाधात न हो जाये। यही कारण है कि उच्च
रक्तचाप को प्राय: ‘’साइलेंट किलर’’ भी कहते है।
अचानक मृत्यु की
स्थिति को सबसे पहले ग्रीस के चिकित्सक हिप्पोक्रेट्स ने ईसा पूर्व 5वीं शताब्दी
में समझा, जिसे ज्यादातर मोटापे के कारण माना गया। 1628 में विलियम हारवे ने रक्त
संचार की सही प्रकृति का पता लगाया। स्टीफन हेल्स ने पहली बार 1733 में धमनियों
में रक्तचाप को मापा। 1819 में स्टेथोस्कॉप का आविष्कार हुआ। 1956 में विकसित
तकनीकों से ह्दय में रक्त पहुंचाने वाली विभिन्न रक्त - नाडि़यों, इन में
रूकावट और ह्दय वाल्वों के कार्य को समझा।
फियोदोर लाइनेन ने पता लगाया कि मानव कोशिकाओं में किस तरह कॉलेस्ट्रोल बनता है, जिसके बाद
रक्त में चर्बी की मात्रा को नियंत्रित करने के तरीके ढूंढे गए। 1985 में मिशेल
ब्राउन और जोसेफ गोल्डस्टेन ने पता लगाया कि कम घनत्व वाला लिपो-प्रोटीन, जो
कॉलेस्ट्रोल को रक्त से कोशिकाओं में ले जाता है, वह किस प्रकार ह्दय में रक्त
पहुंचाने वाली नाडि़यों में जाकर जम जाता है, जिससे ह्दय आघात की संभावना बढ़ जाती
है।
जब रक्तचाप 140 और
90 एमएमएचजी या इससे अधिक होता है और साथ मधुमेह जैसी तकलीफ भी होती है, तो
ह्दयाघात का खतरा बढ़ जाता है। 50 वर्ष या अधिक आयु आयु के हर तीन व्यक्तियों में
से एक व्यक्ति में उच्च रक्तचाप की संभावना बढ़ जाती है।
ह्दय रक्तवाहिनी
नाडि़यों में खराबी के कारण दुनिया में ज्यादा लोग मर रहे हैं, जिनमें अमीर और
गरीब दोनों हैं। जो दिल के दौरे या ह्दयाघात से बच जाते हैं, उन्हें लंबे समय तक
इलाज जारी रखना होता है। इन रोगों का बीमार व्यक्ति या उसके परिवार के सदस्यों
के जीवन पर बहुत गहरा असर पड़ता है।
उच्च रक्तचाप को
रोका जा सकता है। नमक की कम मात्रा लेने, संतुलित भोजन खाने, शराब का सेवन न करने,
नियमित व्यायाम करने, शरीर का वज़न संतुलित रखने और तम्बाकू का इस्तेमाल न करने
से इसका मुकाबला किया जा सकता है।
ह्दय रक्तवाहिनियों
में खराबी को कम करने में नमक की कम मात्रा की भूमिका महत्वपूर्ण है। कई देशों
में जितना नमक का सेवन किया जाता है, उसका दो-तिहाई से ज्यादा नमक प्रसंस्कृत
खाद्य पदार्थों और स्नैक्स या ब्रैड और पनीर जैसी चीजों में शामिल होता है। कई
रेस्टोरेंट भी अधिक नमक, चिकनाई या मिठास वाले खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराते हैं।
इसका मतलब यह हुआ कि उपभोक्ता केवल 20 प्रतिशत नमक की मात्रा को ही नियंत्रण में
रख सकता है। ह्दय रक्तवाहिनी रोग को कम करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने
5 ग्राम प्रतिदिन यानि एक चम्मच से भी कम नमक प्रतिदिन देने की सलाह दी है।
स्वस्थ ह्दय और
शरीर में उचित रक्त संचार के लिए संतुलित भोजन का बहुत महत्व है। ऐसे भोजन में
पर्याप्त फल और सब्जियां, साबुत अनाज, कम मांस, मछली और दालें तथा मामूली नमक,
चीनी और चिकनाई शामिल होती है। इसके साथ हर रोज कम से कम आधे घंटे व्यायाम भी
जरूरी है। तम्बाकू किसी भी रूप हो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सिगरेट के
धुएं से भी नुकसान होता है।
दुनिया के कुछ हिस्सों
में 1980 से 2008 के बीच मोटे लोगों की संख्या दुगुनी हुई है। आज 50 करोड़ लोग
यानि दुनिया की 12 प्रतिशत आबादी मोटापे से पीड़ित है। पुरूषों के मुकाबले महिलाएं
मोटापे से ज्यादा प्रभावित हैं और उन्हें मधुमेह तथा ह्दय रक्तवाहिनी
रोगों का अधिक खतरा है।
दुनिया के हर तीन
प्रौढ़ व्यक्तियों में से एक व्यक्ति उच्च रक्तचाप से पीड़ित है। समझा जाता है
कि इसके कारण 2004 में 75 लाख मौतें हुई, जो कुल मौतों का लगभग 13 प्रतिशत है।
अधिक आमदनी वाले लगभग सभी देशों में रोग की पहचान और इलाज उपलब्ध होने के कारण
ह्दय रोग से होने वाली मौतों में कमी आई है। उदाहरण के लिए 1980 में 30 - 40
प्रतिशत प्रौढ़ व्यक्तियों की अमरीका और यूरोप में उच्च रक्तचाप के कारण मौत
हुई। 2008 में यह कम होकर 23-30 प्रतिशत रह गई। लेकिन अफ्रीकी क्षेत्र में उच्च
रक्तचाप के कारण 40-50 प्रतिशत मौतें हुई। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार
ह्दय रक्तवाहिनी रोगों से 2008 में 73 लाख से अधिक मौतें हुई।
समझा जाता है कि कई
रोगों के मामलों में केवल जीवनचर्या बदलने से रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता
है, लेकिन कई मामलों में इलाज की जरूरत होती है। आंकड़ों से पता चलता है कि
एसपिरिन के सेवन से कॉलेस्ट्रोल के स्तर को नियंत्रण में रखा जा सकता है। ऑक्सीकरण
रोधी विटामिन ई और विटामिन सी के इस्तेमाल से रक्तवाहिनी धमनियों को कड़ा होने
से रोका जा सकता है। लहसुन और प्याज जैसे प्राकृतिक रूप से मिलने वाले ऑक्सीकरण
रोधी पदार्थों का नियमित सेवन भी इस रोग में उपयोगी है।